पीएम धन-धान्य कृषि योजना – PM Dhan Dhanya Krishi Yojana | pm dhan dhanya krishi yojana kya hai | pm धन धान्य कृषि योजना

केंद्र सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM Dhan Dhanya Krishi Yojana) को मंजूरी दी है। यह एक समग्र पहल है, जिसके तहत 11 विभिन्न मंत्रालयों की 36 से अधिक योजनाओं के संसाधनों और लाभों को एक साथ जोड़कर देश के 100 पिछड़े जिलों के किसानों तक पहुँचाया जाएगा। माना जा रहा है कि इस योजना से लगभग 1.7 करोड़ किसान परिवारों को लाभ मिलेगा।

योजना का मुख्य उद्देश्य

प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना का प्राथमिक लक्ष्य चयनित जिलों में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में टिकाऊ वृद्धि करना है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • उत्पादकता बढ़ाना: कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में फसल उत्पादन बढ़ाना।

  • फसल विविधिकरण: किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा अन्य फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करना।

  • जलवायु अनुकूल खेती: ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेल सकें।

  • बुनियादी ढाँचा विकसित करना: सिंचाई सुविधाओं, फसलों के भंडारण के बाद के ढाँचे (पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज) और आधुनिक तकनीकों तक पहुँच बेहतर करना।

योजना का बजट और कार्यक्षेत्र

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रति वर्ष 24,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। यह योजना देश के हर राज्य से कम से कम एक जिले को कवर करेगी, और कुल 100 जिलों का चयन किया जाएगा। योजना को जिला और ब्लॉक स्तर पर लागू किया जाएगा, जिसके लिए हर जिले का एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।

जिला चयन के मापदंड

जिलों का चयन तीन प्रमुख मानदंडों के आधार पर किया जाएगा, ताकि सबसे अधिक जरूरतमंद क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके:

  1. कम उत्पादकता: ऐसे जिले जहाँ प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है।

  2. मध्यम फसल तीव्रता: जहाँ एक वर्ष में जमीन के लंबे समय तक खाली रहने के कारण फसल चक्र की तीव्रता कम है।

  3. औसत से नीचे ऋण पैरामीटर: जहाँ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी सरकारी ऋण सुविधाओं का लाभ कम उठाया गया है।

योजना के कार्यान्वयन की रणनीति

इस योजना की सफलता इसकी अद्वितीय कार्यान्वयन रणनीति पर निर्भर करेगी:

  • अंतर्विभागीय समन्वय: 11 केंद्रीय मंत्रालय आपसी तालमेल से काम करेंगे, जिससे किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से मिल सकेगा।

  • राज्यों की भागीदारी: योजना का क्रियान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से होगा।

  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: निगरानी और समन्वय के लिए तकनीकी साझेदारों की मदद ली जाएगी।

  • हितधारकों को जोड़ना: कृषि से जुड़े सभी हितधारकों जैसे किसान समूह, सहकारी समितियाँ और निजी क्षेत्र को प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

किसानों को होने वाले संभावित लाभ

इस योजना से चयनित जिलों के किसानों को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है:

  • समेकित लाभ: किसानों को एक ही जगह पर विभिन्न सरकारी योजनाओं (बीज, सिंचाई, ऋण, बीमा आदि) की जानकारी और लाभ मिल सकेगा।

  • आय के अतिरिक्त स्रोत: बकरी पालन, मुर्गी पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों और फसल उपरांत छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे आय के नए अवसर पैदा होंगे।

  • आधुनिकता तक पहुँच: खेती की नवीनतम तकनीकों, बेहतर बीजों और कुशल जल प्रबंधन तक पहुँच बढ़ेगी।

  • व्यक्तिगत आवेदन नहीं: ध्यान देने वाली बात है कि इस योजना में किसानों को व्यक्तिगत रूप से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। योजना का लाभ उन्हें अपने जिले के चयन के आधार पर स्वतः मिलेगा।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना कृषि क्षेत्र में सरकार के समन्वित और एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाती है। इसका उद्देश्य सबसे ज्यादा पिछड़े क्षेत्रों में कृषि अर्थव्यवस्था को बदलना है, ताकि वहाँ के किसानों की आजीविका में सुधार हो और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत हो।