
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मेहनतकशों के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने जा रही है। ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ के तहत, प्रदेश के करीब पांच लाख परिवारों को बड़ी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
25 जून को बलौदाबाजार से होगा हस्तांतरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 जून को जिला मुख्यालय बलौदाबाजार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस राशि का हस्तांतरण करेंगे। उस दिन लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे।
कितने परिवारों को मिलेगा कितना लाभ?
इस योजना के तहत राज्य भर के कुल 4 लाख 95 हजार 965 (लगभग 5 लाख) भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार शामिल किए गए हैं। इन सभी परिवारों के लिए राज्य सरकार ने 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये का प्रावधान किया है। योजना के नियमों के मुताबिक, इस राशि का वितरण सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer – प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के जरिए किया जाएगा।
हर परिवार को सालाना मिलेंगे 10 हजार रुपये
‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि हर पात्र परिवार को सरकार की ओर से सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह रकम सीधे लाभार्थियों के खाते में डाली जाएगी।
इस बार बैगा-गुनिया परिवारों को मिलेगा खास तोहफा
योजना की एक और खास बात यह है कि पात्र परिवारों की सूची में इस बार 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवारों को भी शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत और औषधीय ज्ञान को संजोने वाले ये समुदाय अब सरकार की इस मदद से आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनेंगे।
प्रदेश के किस जिले को सबसे ज्यादा फायदा?
अलग-अलग जिलों में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या अलग-अलग है। सबसे अधिक लाभार्थी रायपुर जिले में हैं, जहां यह संख्या 53,338 तक पहुंचती है। वहीं, बिलासपुर में 39,401 और महासमुंद में 37,011 परिवार इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सबसे कम लाभार्थी बीजापुर, कोरिया और नारायणपुर जैसे जिलों में हैं।
सरकार का उद्देश्य: आत्मनिर्भरता और सम्मान
सरकार का मकसद सिर्फ मदद देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और मजदूर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है। सीधे खाते में पैसे ट्रांसफर करने से बिचौलियों की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे हर पैसा लाभार्थी तक पहुंचेगा।
यह बड़ा कदम छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और राज्य के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

