MP कृषि रोडमैप: उन्नत कृषि महोत्सव, MP में किसानों के लिए विशेष कृषि रोडमैप जारी, वैज्ञानिक तरीके से फसलों का चुनाव

मध्य प्रदेश, जिसे कभी ‘बीमारू राज्यों’ में गिना जाता था, आज कृषि के क्षेत्र में देश का एक मॉडल बन चुका है। इस परिवर्तन के शिल्पकार हैं पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान। उनके द्वारा तैयार किया गया “कृषि रोडमैप” केवल एक नीति नहीं, बल्कि प्रदेश के 70 लाख से अधिक किसानों के जीवन को बदलने का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक दस्तावेज है। आइए, इस महत्वाकांक्षी रोडमैप को विस्तार से समझें।

1. रोडमैप की आवश्यकता क्यों?

मध्य प्रदेश की जलवायु विषम है। यहाँ कभी अतिवृष्टि तो कभी सूखा पड़ता है। पारंपरिक खेती (गेहूं-सोयाबीन) पर अत्यधिक निर्भरता के कारण किसानों को मुनाफा कम होता था। शिवराज जी ने महसूस किया कि बिना ठोस रणनीति के कृषि को लाभकारी व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता। इसलिए, वर्ष 2024-25 में इस रोडमैप का प्रारूप तैयार किया गया, जिसे 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया।

2. रोडमैप के प्रमुख स्तंभ

शिवराज सिंह चौहान के इस रोडमैप को 5 प्रमुख स्तंभों में बांटा गया है:

  • जल प्रबंधन (Har Khet Ko Pani): ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देकर 75% फसलों को कम पानी में उगाने की तकनीक।

  • प्राकृतिक खेती (जीरो बजट): रासायनिक खाद के उपयोग को कम करके जैविक और प्राकृतिक खेती को सब्सिडी देना।

  • बहु-फसलीकरण (Diversification): गेहूं-धान के अलावा दलहन, तिलहन और सब्जियों पर जोर।

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सुविधा: हर किसान को आसानी से 3 लाख तक का ऋण।

  • FPO (Farmer Producer Organizations): छोटे किसानों को एकजुट कर बड़े बाजारों तक पहुंच।

3. तकनीकी नवाचार: ड्रोन से लेकर एप तक

इस रोडमैप की सबसे खास बात है डिजिटल कृषि। प्रदेश के हर गांव को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में विकसित करने की योजना है। किसान अब ‘MP Kisan App’ के जरिए फसल की बीमारी, मौसम पूर्वानुमान और मंडी भाव की जानकारी घर बैठे पा सकते हैं। साथ ही, सरकार की ओर से किसानों को ड्रोन तकनीक पर 50% सब्सिडी दी जा रही है ताकि वे कम समय में कीटनाशक का छिड़काव कर सकें।

4. बाजार तक पहुंच: कल आज और अब

शिवराज सरकार ने मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है। अब किसान अपनी उपज को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से राज्य के बाहर भी बेच सकता है। इससे मुनाफा 30% तक बढ़ा है।

5. उपलब्धियां (2026 तक)

प्रमुख संकेतक 2018-19 में स्थिति 2026 (लक्ष्य/उपलब्धि)
सिंचाई क्षमता (हेक्टेयर में) 42 लाख 65 लाख
प्राकृतिक खेती का रकबा 50,000 हेक्टेयर 15 लाख हेक्टेयर
किसानों की आय (प्रति माह) ₹8,000 ₹18,000 (औसत)
FPO (समूहों) की संख्या 1,200 5,000+
फसल बीमा (प्रीमियम में छूट) 2% 1% (किसान का हिस्सा)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: शिवराज सिंह चौहान का कृषि रोडमैप किसानों के लिए क्यों जरूरी है?
उत्तर: यह रोडमैप इसलिए जरूरी है क्योंकि यह पारंपरिक खेती से हटकर जलवायु-अनुकूल और लाभकारी खेती पर केंद्रित है। इसमें किसानों की लागत कम करने (प्राकृतिक खेती) और मुनाफा बढ़ाने (प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग) पर जोर दिया गया है।

प्रश्न 2: क्या इस योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण जरूरी है?
उत्तर: हाँ, प्रत्येक किसान का पंजीकरण ई-किसान पोर्टल पर होना चाहिए। अब तक 60 लाख से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। पंजीकरण निःशुल्क है और इसे ग्राम पंचायत या सीएससी सेंटर पर कराया जा सकता है।

प्रश्न 3: क्या छोटे किसानों (2 एकड़ से कम) के लिए कोई विशेष योजना है?
उत्तर: बिल्कुल। रोडमैप में ‘लघु किसान सशक्तिकरण योजना’ है, जिसके तहत छोटे किसानों को सिंचाई के लिए सौर पंप (सब्सिडी पर) और बीजों पर 75% सब्सिडी दी जाती है। साथ ही, ऐसे किसानों को समूह में जोड़ा जाता है।

प्रश्न 4: प्राकृतिक खेती अपनाने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
उत्तर: सरकार गोबर और गौमूत्र आधारित खेती पर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर तक की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके अलावा, प्रशिक्षण और वर्मी कंपोस्ट टैंक निर्माण पर पूरी सहायता दी जाती है।

प्रश्न 5: क्या यह रोडमैप सिर्फ शिवराज सिंह चौहान की सरकार के कार्यकाल तक सीमित है?
उत्तर: नहीं, यह रोडमैप एक ‘पीपल्स प्लान’ है। हालांकि इसके प्रणेता शिवराज जी हैं, लेकिन कृषि विभाग और किसान संगठनों ने मिलकर इसे बनाया है। अब यह प्रदेश की स्थायी नीति का हिस्सा बन चुका है, जिसे कोई भी सरकार आगे बढ़ाएगी।

प्रश्न 6: इस रोडमैप में फसलों का बीमा कैसे होता है?
उत्तर: ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत, मध्य प्रदेश सरकार किसान के प्रीमियम हिस्से का 50% खुद वहन करती है। यानी, पहले जहाँ किसान 2% प्रीमियम देता था, अब सिर्फ 1% देना होता है। फसल बर्बाद होने पर पूरा मुआवजा बैंक खाते में आता है।

निष्कर्ष

शिवराज सिंह चौहान का कृषि रोडमैप सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि एक आर्थिक क्रांति की नींव है। इसने मध्य प्रदेश के किसान को न सिर्फ अन्नदाता बल्कि एक उद्यमी (Entrepreneur) बनने का आत्मविश्वास दिया है। डिजिटल टूल्स, प्राकृतिक खेती और प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज का यह त्रिकोण दूसरे राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन चुका है। यदि यह रोडमैप पूर्ण रूप से लागू होता है, तो 2030 तक मध्य प्रदेश ‘देश की रसोई’ के साथ-साथ ‘किसानों की स्वर्गभूमि’ भी बन जाएगा।

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